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ज्ञान का पेनरोज़ गर्त

ज्ञान का पेनरोज़ गर्त

“जब ज्ञान स्वयं से यह पूछना आरम्भ करता है कि मैं किस प्रकार का मनुष्य बना रहा हूँ, तभी वह प्रज्ञा में रूपान्तरित होता है।”

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नये युग का नया मन

नये युग का नया मन

“प्रज्ञा का अर्थ अपने सत्य की रक्षा करना नहीं, बल्कि अपनी समझ को निरन्तर विस्तृत करते रहना है।”

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