“चेतन जीवन का अर्थ निश्चितता पाना नहीं, बल्कि अपने वर्तमान स्वरूप और अपनी संभावित सत्ता के बीच चलने वाले संवाद के प्रति जागृत रहना है।”
विराम और उद्घोषणा के बीच
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“चेतन जीवन का अर्थ निश्चितता पाना नहीं, बल्कि अपने वर्तमान स्वरूप और अपनी संभावित सत्ता के बीच चलने वाले संवाद के प्रति जागृत रहना है।”
“सभ्यताएँ केवल निर्माण से महान नहीं बनतीं; वे इस बात से महान बनती हैं कि निर्माण करते समय वे स्वयं से प्रश्न पूछती रहती हैं।”
“जीवन के सबसे मूल्यवान क्षण अक्सर वही होते हैं, जिन्हें हम जीते समय पहचान नहीं पाते।”