“नीत्शे और श्री अरविन्द दो विरोधी शिखर नहीं हैं; वे मानव-पर्वत पर चढ़ने की दो भिन्न राहें हैं।”

मानव-पर्वत की दो राहें
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“नीत्शे और श्री अरविन्द दो विरोधी शिखर नहीं हैं; वे मानव-पर्वत पर चढ़ने की दो भिन्न राहें हैं।”

“हम संसार को जैसा वह है वैसा नहीं देखते; हम उसे वैसा देखते हैं जैसा हमारा मन उसे देखना चाहता है।”

“गीता अतीत की पुस्तक नहीं, मानव चेतना का भविष्य-संगत ऑपरेटिंग सिस्टम है। वह हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा उन्नयन बाहर के उपकरणों का नहीं, भीतर की चेतना का है। हम अपने उपकरणों को नहीं, स्वयं को अपग्रेड करें—यही गीता का शाश्वत संदेश है।”
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