प्रौद्योगिकी-सहायित सुख

प्रौद्योगिकी-सहायित सुख

“प्रौद्योगिकी सुख का निर्माण नहीं करती; वह केवल उन परिस्थितियों का निर्माण कर सकती है जिनमें मनुष्य सुख का अनुभव कर सके।”

ज्ञान का पेनरोज़ गर्त

ज्ञान का पेनरोज़ गर्त

“जब ज्ञान स्वयं से यह पूछना आरम्भ करता है कि मैं किस प्रकार का मनुष्य बना रहा हूँ, तभी वह प्रज्ञा में रूपान्तरित होता है।”

नये युग का नया मन

नये युग का नया मन

“प्रज्ञा का अर्थ अपने सत्य की रक्षा करना नहीं, बल्कि अपनी समझ को निरन्तर विस्तृत करते रहना है।”

विराम और उद्घोषणा के बीच

विराम और उद्घोषणा के बीच

“चेतन जीवन का अर्थ निश्चितता पाना नहीं, बल्कि अपने वर्तमान स्वरूप और अपनी संभावित सत्ता के बीच चलने वाले संवाद के प्रति जागृत रहना है।”

नया महाप्राचीर

नया महाप्राचीर

“सभ्यताएँ केवल निर्माण से महान नहीं बनतीं; वे इस बात से महान बनती हैं कि निर्माण करते समय वे स्वयं से प्रश्न पूछती रहती हैं।”

मनुष्य होने का अर्थ क्या है

मनुष्य होने का अर्थ क्या है

“मनुष्य केवल बुद्धिमान प्राणी नहीं; वह ऐसा प्राणी है जो ब्रह्माण्ड पर विचार कर सकता है और उसकी व्याख्या कर सकता है।”

शाश्वत, क्षणभंगुर और मैं

शाश्वत, क्षणभंगुर और मैं

“जीवन को समझना शायद घटनाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें जोड़ने वाले अदृश्य सूत्र को पहचानना है।”

मानव-पर्वत की दो राहें

मानव-पर्वत की दो राहें

“नीत्शे और श्री अरविन्द दो विरोधी शिखर नहीं हैं; वे मानव-पर्वत पर चढ़ने की दो भिन्न राहें हैं।”

माया और मन का दर्पण

माया और मन का दर्पण

“हम संसार को जैसा वह है वैसा नहीं देखते; हम उसे वैसा देखते हैं जैसा हमारा मन उसे देखना चाहता है।”

गीता ओएस

गीता ओएस

“गीता अतीत की पुस्तक नहीं, मानव चेतना का भविष्य-संगत ऑपरेटिंग सिस्टम है। वह हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा उन्नयन बाहर के उपकरणों का नहीं, भीतर की चेतना का है। हम अपने उपकरणों को नहीं, स्वयं को अपग्रेड करें—यही गीता का शाश्वत संदेश है।”